मधयप्रदेश को बड़ी सौगात: इंदौर-भोपाल में मेट्रो को केंद्र की हरी झंडी, जानिए क्या हैं पूरी प्लानिंग

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने इंदौर और भोपाल को बड़ी सौगात दी है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मध्यप्रदेश के इन दोनों प्रमुख शहरों में मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी गई।

कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि भोपाल में 27.87 किमी लंबा का मेट्रो प्रोजेक्ट रहेगा वहीं इंदौर में 31.55 किमी लंबी मेट्रो कनेक्टिविटी रहेगी। दोनों परियोजनाओं के लिए केंद्र तथा प्रदेश सरकार आधा-आधा पैसा लगाएगी। दोनों शहरों में चार साल में प्रोजेक्ट पूरा होगा। भोपाल में 6,941 करोड़, तो इंदौर में 7,500 करोड़ खर्च आएगा।

इससे पहले भोपाल और इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बड़ी बाधा दूर हो गई थी। प्रोजेक्ट पर विदेशी बैंकों से लोन लेने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय के प्रोजेक्ट इंवेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) की मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद प्रोजेक्ट मोदी कैबिनेट में रखा गया।

दिल्ली में प्रोजेक्ट इंवेस्टमेंट बोर्ड की बैठक में भोपाल और इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली थी। मुख्य सचिव बीपी सिंह और नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव विवेक अग्रवाल इस बैठक में दिल्ली गए थे।

भोपाल मेट्रो के लोन की मंजूरी के लिए यूरोपियन इंवेस्टमेंट बैंक (ईआईबी) की टीम इस माह या नवंबर में भोपाल आ सकती है। वहीं इंदौर मेट्रो के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से मंजूरी ली जाएगी। एडीबी की टीम भी मप्र आ सकती है।

यूरोपियन इंवेस्टमेंट बैंक भोपाल मेट्रो के लिए लगभग 3500 करोड़ रुपए लोन देगा। वहीं एशियन डेवलपमेंट बैंक से इंदौर मेट्रो के लिए लगभग 3200 करोड़ रुपए का लोन मिलेगा। राजधानी में मेट्रो के दो कॉरीडोर बनाने पर 6962.92 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इंदौर में एक रूट बनाने के लिए लगभग 7500 करोड़ रुपए की लागत आएगी।

राज्य सरकार मेट्रो का काम शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से उसके हिस्से की 20 फीसदी राशि मांग सकती है। लोन की राशि लेने के लिए राज्य सरकार को मेट्रो का कुछ काम दिखाना होगा। मेट्रो प्रोजेक्ट में केंद्र सरकार 20 फीसदी पैसा देगी। इसके अलावा मेट्रो रेल कंपनी पीपीपी से भी फंड जुटाएगी। स्टांप ड्यूटी पर एक फीसदी सेस लगाकर करीब 200 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे।